Delhi Blast 2025 में लाल क़िले के पास कार धमाके में 13 लोगों की मौत हुई। NIA की जांच में बड़े आतंकी नेटवर्क और 32 कारों की साजिश का खुलासा हुआ। पूरी रिपोर्ट पढ़ें -
Delhi Blast 2025: लाल क़िले के पास कार धमाका की पूरी रिपोर्ट और जांच अपडेट
Delhi Blast 2025 में लाल क़िले के पास कार धमाके में 13 लोगों की मौत हुई। NIA की जांच में बड़े आतंकी नेटवर्क और 32 कारों की साजिश का खुलासा हुआ। पूरी रिपोर्ट पढ़ें -
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नमस्कार दोस्तों ।
10 नवंबर 2025 शाम को 6:45 दिल्ली में रेडफोर्ट के पास मौजूद सुनहरी मस्जिद पार्किंग लॉट से एक Hyundai i20 की गाड़ी बाहर निकलती है। ये गाड़ी लाल किले के पास से यू टर्न लेकर सीधा उसके सामने वाली सड़क पर आती है। 6:52 यह बहुत धीरे-धीरे चलकर एक रेड लाइट पर आकर रुक जाती है। यह वाली रेड लाइट लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर वन से बहुत नजदीक थी और कुछ ही सेकंड बाद दोस्तों एक बहुत बड़ा धमाका होता है।
यह धमाका इतना बड़ा था कि इससे आसपास की कम से कम छह गाड़ियां और तीन ऑटो रिक्शाज में आग लग जाती है। पास की मौजूद स्ट्रीट लाइट्स बुझ जाती है और मेट्रो के एंट्री गेट पर लगा शीशा टूट जाता है। कई सारी गाड़ियां जो और दूर खड़ी थी उनके तक शीशे टूट जाते हैं और जो गाड़ियां इस धमाके के पास थी उनका मलबा 150 मीटर दूर जाकर उड़ता है।
जिस वक्त ये ब्लास्ट हुआ उस वक्त दो अलग-अलग लोग फिल्मिंग कर रहे थे। इस ब्लास्ट की इंटेंसिटी कितनी ज्यादा थी। सब कुछ हिल गया। इतना बड़ा पेड़ तक हिल गया। वहां मौजूद शॉपकीपर्स का कहना है कि इतनी तेज आवाज उन्होंने पहले कभी नहीं सुनी थी। बहुत भयंकर धमाका धमांकर धमाका है। बहुत जोर से आवाज थी। ऐसी आवाज हमने पहले नहीं सुनी। बताया जाता है कि धमाके की आवाज करीब 2.5 कि.मी. दूर आईटीओ तक सुनाई दी।
6:55 पर दिल्ली Fire Services को कॉल आती है। जिसके बाद उन्होंने आग पर काबू करने के लिए सात फायर टेंडर्स को डिस्पैच कर दिया। एक आई विटनेस बताता है कि इस ब्लास्ट के 10 मिनट के अंदर-अंदर लगभग 7:00 बजे के अराउंड पुलिस वहां पर आ गई थी और 7:15 तक एंबुलेंसेस भी वहां पहुंच गई थी। चांदनी चौक के लोकल लोग वहां मौजूद विक्टिम्स की बहुत मदद करते हैं और एंबुलेंस पहुंचने से पहले ही कई विक्टिम्स को तो ई रिक्शास के जरिए पहले ही हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया था। धमाके में कुल मिलाकर 20 से ज्यादा लोग घायल होते हैं। जिन्हें तुरंत लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल ले जाया जाता है। घायल लोगों में से आठ लोगों की हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है और अभी तक की इनफेशन के हिसाब से इस ब्लास्ट में 13 लोगों की जान जा चुकी है। धमाके की सूचना मिलने पर बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड और फॉरेंसिक्स की टीम्स भी मौके पर पहुंचती हैं। और कुछ समय बाद नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी एनआईए और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड एनएसजी भी यहां पर पहुंच जाते हैं।
ये सारी एजेंसी साथ मिलकर मामले की जांच कर रही हैं। लेकिन अभी तक ऑफिशियली उनकी या सरकार की तरफ से कुछ बताया नहीं गया है कि यह धमाका कैसे हुआ और किसने किया। इस घटना में मारे गए लोगों में से अभी तक छह लोगों की पहचान हो पाई है।
इनमें से एक हैं उत्तर प्रदेश के रहने वाले लोकेश अग्रवाल जो हॉस्पिटल में एडमिट अपने बेटे की सास से मिलने दिल्ली आए थे। इसके अलावा अमरोहा में रहने वाले डीटीसी के बस कंडक्टर अशोक कुमार अपनी ड्यूटी करके घर जा रहे थे। एक और विक्टिम पंकज सैनी एक कैब ड्राइवर थे और एक विक्टिम दिनेश मिश्रा चांदनी चौक में एक साड़ी और लहंगा बेचने वाली दुकान में काम करते थे। एक दूसरे विक्टिम नोमान एक कॉस्मेटिक स्टोर में काम करते थे और इसी तरह जुम्मन मोहम्मद ई रिक्शा चलाते थे और अपने फैमिली के इकलौते earner थे।
रात को 10:00 बजे के आसपास होम मिनिस्टर अमित शाह घायलों से मिलने इस हॉस्पिटल पहुंचते हैं जिसके बाद वो उस जगह पर भी जाते हैं जहां पर धमाका हुआ था और फिर उनकी तरफ से एक बयान दिया जाता है।
Amit Shah - हम सभी एंगल को खुला रखते हुए इसकी गहन जांच शुरू कर दी। अब यहां पर सोर्सेस के हवाले से इंडियन मीडिया में कई सारी खबरें चल रही हैं। लेकिन आपको तो इनकी क्रेडिबिलिटी पता ही है। तो जो भी चीजें अब मैं आगे बताने जा रहा हूं इस चीज का ध्यान रखना
टाइम्स ऑफ इंडिया ने सोर्सेस के हवाले से बताया है कि इस Hyundai i20 गाड़ी का नंबर प्लेट था HR26 CE7674। द हिंदू को सोर्सेस ने बताया कि इस गाड़ी का ओनर मोहम्मद सलमान था जो हरियाणा के गुड़गांव में रहने वाला था। पुलिस ने जब सलमान को डिटेन किया तो उनको पता चला कि सलमान ने यह गाड़ी दिल्ली के ओखला में रहने वाले देवेंद्र को बेच दी थी। उसके बाद यह गाड़ी देवेंद्र ने अंबाला में किसी को बेच दी थी और उसके बाद यह गाड़ी और किसी के पास गई।
कुछ अखबारों के अनुसार यहां पर एक पुलवामा में रहने वाले तारीख का भी एंगल है। इसकी आगे बात करते हैं में, लेकिन इससे पहले मैं बताना चाहूंगा कि धमाके के बाद दिल्ली के अलावा मुंबई समेत देश के कई इलाकों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। हालांकि ऑफिशियली अभी तक नहीं कहा गया है कि एक आतंकी हमला था या कोई एक्सीडेंट था लेकिन कई ऐसी चीजें हैं जो इसकी तरफ संकेत देती हैं कि सरकार अब इसे एक आतंकी हमला मानकर ही चल रही है।
पहला दिल्ली पुलिस ने इस मामले में यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज कर दी है जिसका इस्तेमाल आतंकवाद से संबंधित मामलों में ही होता है और दूसरा भूटान के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इस धमाके को एक साजिश बताया है। इसके पीछे के षड्यंत्रकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके पीछे जिसका भी हाथ है उसे बख्शा नहीं जाएगा और इसकी इन्वेस्टिगेशन को अब NIA के हवाले कर दिया गया है जो कि एक काउंटर टेररिज्म एजेंसी है। अब इस पूरे इंसिडेंट को दोस्तों फरीदाबाद में हुई एक घटना से लिंक करके देखा जा रहा है। दरअसल बात क्या है कि 10 नवंबर के ही दिन जम्मू कश्मीर और हरियाणा पुलिस ने मिलकर कश्मीर में रहने वाले दो डॉक्टर्स को गिरफ्तार किया था।
आरोप यह है कि यह डॉक्टर्स पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अलकायदा से जुड़े अंसर गजवातुल हिंद यानी एजीएच के लिए काम कर रहे थे। असल में कुछ समय पहले श्रीनगर के नौगाम एरिया में जैश-ए-हम्मद के सपोर्ट में कई पोस्टर्स लगाए गए थे। इन पोस्टर्स पर पुलिस और आर्मी को धमकी दी गई थी और जब जम्मू कश्मीर पुलिस ने जांच करी तो इसमें काजीगुंड के डॉक्टर आदिल मजीद रादर का नाम आया जो उस वक्त उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक हॉस्पिटल में काम कर रहा था। आदिल को सहारनपुर से गिरफ्तार किया जाता है और पता चलता है कि पिछले साल अक्टूबर तक यह अनंत नाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में काम करता था। जब पुलिस ने इस मेडिकल कॉलेज में आदिल का लॉकर चेक किया तो उन्हें यहां से एक AK-47 मिली। फिर आदिल के जरिए पुलिस पुलवामा में रहने वाले डॉक्टर मुजामिल अहमद गनाई तक पहुंची जो अभी फरीदाबाद की अलफाला यूनिवर्सिटी एंड हॉस्पिटल में पढ़ाता था। लगभग 10 दिन पहले मुजामिल को डिटेन कर लिया गया था और उसके बयान के आधार पर फरीदाबाद के एक गांव में छापा मारा गया था। जहां उसने किराए पर एक घर ले रखा था। इस घर में दोस्तों पुलिस को लगभग 360 किलो के एक्सप्लोसिव्स मिलते हैं। अप्रोक्समेटली 360 केजी जो है इनफिलेबल मटेरियल बरामद हुआ है जो कि सस्पेक्टेड अमोनियम नाइट्रेट है। बाद में और रेड्स की गई तो एक्सप्लोसिव्स का नंबर 3000 किलो से ज्यादा बताया जा रहा है। इसमें अमोनियम नाइट्रेट होने का शक है जिसे बम बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा पुलिस ने यहां से एक वॉकी टटॉकी 20 टाइमर्स, बैटरीज, रिमोट्स और 5 किलो हैवी मेटल्स और इलेक्ट्रिक वायर्स जैसे बम बनाने वाले सामान को भी इकट्ठा किया। यहीं पर एक क्रिंक राइफल, तीन मैगजीनंस और एक पिस्तौल भी मौके पर मिली। यह सब देखकर यह बात साफ थी कि यहां पर एक बड़ी साजिश रची जा रही थी। इनकी गिरफ्तारी के बाद, लेकिन दिल्ली में रेडफोर्ट के ब्लास्ट से पहले पुलिस ने यह भी कहा था कि यह ऑपरेशन अभी भी जारी है। तो फरीदाबाद में आतंकवाद के आरोप में जो अरेस्ट हुए और दिल्ली में जो रेडफोर्ट ब्लास्ट हुआ, इन दोनों को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस ने जम्मू कश्मीर पुलिस के टॉप सोर्सेस के हवाले से बताया है कि दिल्ली में जो ब्लास्ट हुआ वो फरीदाबाद में अरेस्टेड लोगों से कनेक्टेड है। हालांकि इस बात को भी अभी तक ऑफिशियली नहीं कंफर्म किया गया है सरकार के द्वारा। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस ग्रुप में मुजामिल और आदिल के अलावा दो और डॉक्टर्स शामिल थे। इनमें से एक लखनऊ की एक महिला डॉक्टर है जिसे गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन एक डॉक्टर उमर नबी अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद गायब हो गया था और इसी उमर नबी पर यह धमाका करने का शक है। लेजिडली यह पुलवामा के उसी कोयल गांव का रहने वाला है जिससे मुजामिल आता है और यह भी अलफला यूनिवर्सिटी में काम करता था। मुजामिल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इसको तलाश कर रही थी। इस उमर नबी को दिल्ली धमाके से जोड़ने वाला एक और प्रूफ यह Hyundai की i20 गाड़ी को बताया जा रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स ने पुलिस सोर्सेस के हवाले से बताया कि धमाके में इस्तेमाल हुई यह गाड़ी आखिरी बार उमार के पास थी और धमाके से पहले उमार ही गाड़ी को चला रहा था। एक सीनियर ऑफिशियल द प्रिंट को बताते हैं कि अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद उमार घबरा गया था और उसने जल्दबाजी में यह धमाका किया। ऑफ इंडिया ने सोर्सेस को कोट करते हुए कहा है कि यह ब्लास्ट पैनिकिक और डेस्परेशन में किया गया। यह बॉम्ब लूजली असेंबल्ड था और पूरी तरह से डेवलप नहीं हुआ था। जिसकी वजह से इसका लिमिटेड इंपैक्ट रहा और कोई शार्पनल नहीं मिले। उनके अनुसार उमर ही इस गाड़ी को चला रहा था और इस ब्लास्ट के एक्सप्लोसिव्स उसी तरह के हैं जैसे फरीदाबाद रेड्स में मिले थे। पुलिस यह जांच कर रही है कि मारे हुए लोगों में उमार शामिल है या नहीं। इसके लिए उमार की मां का डीएनए सैंपल लिया गया है। यह एक बेहद ट्रैजिक और दिल दहला देने वाली घटना है। 13 मासूम लोगों की जान चली गई। कितने परिवार उजड़ गए। ऐसी घटनाओं के बाद जो सबसे जरूरी चीज होती है वो यह है कि हम सब अपना धैर्य और विवेक बनाए रखें। आतंकवादियों का मकसद होता है देश में आतंक फैलाना और ऐसे समय में इसलिए जरूरी होता है एक दूसरे के साथ खड़े रहना। तीन चीजों से यहां पर दूरी बनाकर रखे हैं। पहला वो टीवी मीडिया चैनल्स जो इस इंसिडेंट को सेंसेशनलाइज करेंगे टीआरपी के लिए। दूसरा सोशल मीडिया पर वो नफरतखोर ट्रोल्स जो इस इंसिडेंट का इस्तेमाल करेंगे समाज में नफरत फैलाने के लिए। इन लोगों को पहचानना इतना मुश्किल नहीं है। यह हमेशा इस फिल्मी विलेन की फोटोस और वीडियोस शेयर करते हैं। वो ऐसे आतंकवादी हमलों का इस्तेमाल करते हैं अपने अंदर भरी नफरत को जस्टिफाई करने के लिए और समाज में यही नफरत फैलाने के लिए और तीसरा अपने अंदर के खुद के बाएस। बहुत से लोगों की ये टेंडेंसी रहती है जब किसी भी इंसिडेंट में सफिशिएंट इंफॉर्मेशन अवेलेबल नहीं है तो वो इंस्टेंटली कंक्लूजंस पर जंप करने की कोशिश करते हैं। जैसे कि कई सारे कमेंट्स मैंने सोशल मीडिया पर देखे कि बिहार इलेक्शंस अगले दिन थी। उससे पिछली रात को धमाका हुआ तो पक्का इसके बीच में कोई कनेक्शन होगा। मैं मानता हूं कि इस सरकार ने ऐसे कई काम किए हैं जिससे इन पर बिल्कुल ट्रस्ट नहीं किया जा सकता। लेकिन इस तरीके से बिना किसी सबूत के इस तरीके से कंक्लूजन पर पहुंच जाना यह भी बहुत गलत है। चीजों को हमेशा क्रिटिकल नजरिए से देखिए। लेकिन बेबुनियादी कंस्परेसी थ्योरीज मत फैलाइए। लेकिन इसके अलावा यहां पर सवाल पूछने भी जरूरी है। कई सारे सवाल यहां पर उठते हैं। खासतौर पर होम मिनिस्टर अमित शाह के ऊपर। जनता के सामने उनकी अकाउंटेबिलिटी बनती है। आखिर बॉर्डर उनके कंट्रोल में है। देश की इंटरनल सिक्योरिटी उनके कंट्रोल में है। तो सबसे बड़ा सवाल यहां पर यह उठता है कि आखिर 3000 किलो एक्सप्लोसिव्स कैसे आ गए फरीदाबाद में? ये वही सवाल है जो 6 साल पहले भी उठा था पुलवामा हमले के दौरान। आखिर 300 किलो एक्सप्लोसिव्स कैसे आ गए देश के अंदर? मैं उम्मीद करता हूं यहां पर अच्छे से इन्वेस्टिगेशन होगी और सालों तक का इंतजार नहीं करना पड़ेगा जनता को इस सवाल का जवाब पाने के लिए। अब इससे बिल्कुल अनरिलेटेड टॉपिक पर दोस्तों मैं अनाउंस करना चाहूंगा कि 29 नवंबर को हम एआईएफ यस्ता का पहला क्वार्टरली वेबिनार करने जा रहे हैं। यह वेबिनार उन सब लोगों के लिए है जिन्होंने एआईएफ यस्ता का एनुअल सब्सक्रिप्शन खरीद रखा है। इसमें हम कई सारी अलग-अलग चीजें सिखाएंगे। पावर यूज़र्स के लिए कई सारी ट्रिक्स कैसे आप एफ यस्ता का फुल पोटेंशियल पर इस्तेमाल कर सकते हो। बहुत सा डिटेल्ड फीडबैक जहां पर हम आपके यूज़ केसेस को समझेंगे और आपको बेहतर सजेशंस देंगे। टॉप 10 और टॉप 100 यूजर अवार्ड्स जहां पर आप में से कई सारे लोगों को कई सारे तोहफे दिए जाएंगे। अगर आपने एआईएस का अभी तक ज्वाइन नहीं किया है तो यह आपके लिए बढ़िया मौका है। दुनिया के सारे पावरफुल एआई की ताकत आपको यहां पर एक ही ऐप में मिलती 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